मातृ दिवस पर महिला अधिकारियों से खास बातचीत

हरिद्वार। महिला सशक्तिकरण का मतलब है कि इस समाज मे महिला की भूमिका कितनी प्रभावी है। महिला प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पसंद के हिसाब से निर्णय लेने में सक्षम हो। सशक्तिकरण का अर्थ महिला की शक्ति से ही है कि महिला घर मे, परिवार में, सोसायटी में, आफिस में, अपने फैसलों को किस तरह से लेती है। पुराने समय की बात करें तो महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नही थीं। स्वतंत्रता के नाम पर महिलाओं के पास कुछ भी नही था। समाज मे पुरुष ने महिला को वो सम्मान नही दिया जिसकी वो हकदार थी। लेकिन आज समय बदल चुका है। समाज मे परिवर्तन आ चुका है। बेटियों को भी बेटों के बराबर ही देखा जाता है। आज समाज मे महिलाओं की दशा में बहुत सुधार हुआ है। महिला आज प्रत्येक क्षेत्र में बुलंदियों को छू रही है। आज महिलाएं आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, पीपीएस, जुडिशियली, आर्मी, व लगभग प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं ने दमदार उपस्थिति दर्ज करायी है। हरिद्वार जनपद में तो महिला सशक्तिकरण का साक्षात नमूना दिखाई देता है। जनपद के बहुत ही महत्वपूर्ण पदों पर महिला अधिकारी सकुशल अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। हरिद्वार में तैनात महिला अधिकारियों से मातृ दिवस पर खास बातचीत——
स्वाति भदौरिया 
मुख्य विकास अधिकारी , हरिद्वार
स्वाति भदौरिया का कहना है कि महिला सशक्तिकरण को मजबूती सबसे पहले घर से ही मिलती है। महिला अधिकारी को निजी पारिवारिक व प्रोफेसनल जिंदगी को बैलेंस व मैनेज करना होता है। लेकिन महिलाएं दोनों जगह ही सफलतापूर्वक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती है। उन्होंने कहा कि सफल जिम्मेदारी निर्वहन में पति व बेबी का भी योगदान होता है। प्रशासनिक अधिकारियों के रूप में महिलाएं कुशलता पूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।
रचिता जुआल
एएसपी, हरिद्वार 
रचिता जुआल का कहना है महिलाएं अपनी निष्ठा से किसी मुकाम पर पहुंचती है तो वह उसकी कीमत को ज्यादा महत्व देती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नही है लेकिन आज भी समाज मे महिला को आगे बढ़ने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। उन्होंने कहा कि वर्दी का इकबाल बुलंद रखने के लिए सच्चाई, मेहनत, हिम्मत व ठोस इरादों से भरी महिलाओं का पुलिस विभाग में बड़ा योगदान है।
अर्चना
जिला सूचना अधिकारी, हरिद्वार
अर्चना का कहना है कि महिलाएं जो भी काम करती है चाहे वो किसी भी क्षेत्र में हो बिल्कुल सटीक करती हैं। मेरा मानना है कि बेहतर कुशल प्रबंधन क्षमता महिलाओं के अंदर ज्यादा होती है जो गॉड गिफ्टेड है। उन्होंने कहा कि महिला बैलेंसिंग का काम भी पुरुषों से बेहतर करती है चाहे वो घर हो या आफिस। उन्होंने ये भी कहा कि महिला अपने काम के बारे में बहुत उत्साहित रहती है वो सोचती है कि उसे सुननी न पड़े तो काम करने के प्रयास बहुत अच्छे होते है।
ममता वोहरा
एसपी सिटी, हरिद्वार
ममता वोहरा का कहना है कि आज महिलाएं जो आगे बढ़ रही है उसमें सबसे पहले घर का सहयोग ही है। समाज ने भी अपनी स्वीकार्यता दी है। उन्होंने कहा कि घर मे बच्चियों को भी समान अवसर दें तो वह हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है। महिला में क्षमता की कमी नही है बस उसे अपॉरचुनिटी मिलनी चाहिए। महिला सशक्तिकरण में घर का सपोर्ट बहुत जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि पर्सनल लाइफ ऑफिस नही जाती है लेकिन जॉब घर तक जरूर आ जाता है और यही बैलेंस व मैनेज करना होता है। और मेरा मानना है कि महिला यह सबसे बेहतर करती हैं।
मीरा कैंथुरा
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, हरिद्वार
मीरा कैंथुरा का कहना है कि महिला में पर्सनल व प्रोफेसनल लाइफ को बेलेंस करने की क्षमता ईश्वरीय देंन है। परिवार का सहयोग मिलने से ही दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन बखूबी कर पाती है। उन्होंने कहा कि कभी अपेक्षित सहयोग न मिल पाने पर भी सहनशक्ति व आत्मविश्वास के कारण ही मा, पत्नी, बहन व बेटी की भमिका का निर्वहन अच्छी तरह से कर लेती हैं। उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी गलत काम के लिए चाहे घर हो या ऑफिस महिला को प्रतिकार करना चाहिए। इससे महिला सुदृढ़ व माजबूत बनेगी।
अंजली रावत
जिला महाप्रबंधक उद्योग केंद्र, हरिद्वार
अंजली रावत का कहना है कि महिलाएं समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।महिला अपने व्यक्तिगत व कार्यस्थल दोनों के दायित्व बखूबी निभाती हैं। इसके साथ ही जीवन के हर रोल मा ,पत्नी, बहु, बेटी व बहन में सामंजस्य बिठाते हुए समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। उन्होंने कहा कि एक माँ ( महिला) ही बच्चों की पहली पाठशाला होती है जो उन्हें परवरिश व शिक्षा प्रदान करने के लिए भावनात्मक बल देती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में भ्रस्टाचार की शिकायतें नगण्य है। उन्होंने ये भी कहा कि महिला अधिकारी निर्णय लेने में दिल और दिमाग दोनों से सक्षम होती है।

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