वॉटसन के धमाकेदार प्रदर्शन की वजह से सीएसके) ने जीता फाइनल

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ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वॉटसन अपने धमाकेदार प्रदर्शन की वजह से एक बार फिर चर्चा में हैं. आईपीएल के एक सत्र में दो या दो से ज्यादा शतक लगाने वाले दुनिया के चौथे और पहले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बन गए हैं.

लंबी खामोशी के बाद वॉटसन एक बार फिर आईपीएल में अपने लाजवाब प्रदर्शन की वजह से सुर्खियों में हैं. आईपीएल के 11वें संस्करण में वॉटसन (सीएसके) के साथ जुड़े और 20 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ लीग मुकाबले में 57 गेंदों में 106 रनों की शतकीय पारी खेलकर सभी को बता दिया था कि वह अभी फीके नहीं हुए हैं और उनमें अभी भी काफी दमखम बचा हुआ है.

दो पारियों में शतक, 57-57 गेंदों में लगाए

आईपीएल-11 में अपना पहला शतक लगाने के 37 दिन बाद वॉटसन का बल्ला फिर बोला और खिताबी जंग में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच में भी 57 गेंदों में ही 117 रनों की नाबाद पारी खेल डाली. अपनी इस पारी में 11 चौके और 8 छक्के भी लगाए.

फाइनल मैच में लगाया गया यह शतक इस लिहाज से भी खास है क्योंकि 20 दिन बाद 37 साल के होने वाले वॉटसन ने इस मैच में कुल 57 गेंदों का सामना किया जिसमें शुरुआती 10 गेंदों पर वह अपना खाता भी नहीं खोल सके थे और उन्होंने अपना शतक पारी की 51वीं गेंद पर लगाया.

इस तरह से 11वीं गेंद पर खाता खोलने के बाद उनकी बल्लेबाजी ने लय पकड़ ली और अगले 41 गेंदों में शतक ठोककर यह दिखा दिया कि उनकी हड्डियों में ताबड़तोड़ पारी खेलने दम बचा हुआ है. उनकी पारी की एक खास बात यह भी रही कि अपनी पारी की अंतिम गेंद पर भी वह कोई रन नहीं बना सके थे.

मैक्कुलम से आगे निकले वॉटसन

वॉटसन आईपीएल इतिहास में ऐसे पहले बल्लेबाज बन गए जिन्होंने शुरुआती 10 गेंदों में खाता नहीं खोलने के बाद अपनी पारी को शतकीय पारी में तब्दील कर दिया. इससे पहले 2008 में न्यूजीलैंड के ब्रैंडन मैक्कुलम ने कमाल कर दिखाया था.

18 अप्रैल, 2008 को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के साथ मुकाबले में मैक्कुलम शुरुआती 6 गेंदों में खाता ही नहीं खोल सके, लेकिन इसके बाद उन्होंने जो लय पकड़ी वो पारी खत्म होने के साथ ही रुकी. मैक्कुलम ने 73 गेंदों में 158 रनों की अविजित पारी खेली. इसके बाद यह 6 साल तक आईपीएल की सबसे बड़ी पारी बनी रही.

वॉटसन उन चुनिंदा विदेशी क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्हें भारत में बेहद सम्मान मिलता है और लोग उन्हें खासा पसंद करते हैं. उन्होंने इस सत्र में 2 शतक लगाए और आईपीएल करियर में अब उनके खाते में कुल 4 शतक हो गए हैं. वह आईपीएल फाइनल में लक्ष्य का पीछा करते हुए शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज भी बने.

कभी ऑस्ट्रेलिया के भी थे खास

एक जमाना था जब वॉटसन को कंगारू टीम के सबसे प्रतिभाशाली क्रिकेटरों में शुमार किया जाता था और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) भी इस खिलाड़ी पर खास नजर बनाए रखता था. सीए की कोशिश रहती थी कि वॉटसन पर ज्यादा मैच खेलने का दबाव न डाला जाए ताकि बड़े मैचों के लिए यह खिलाड़ी पूरी तरह से फिट रहे.

वॉटसन एक बेहतरीन बल्लेबाज तो हैं ही गेंदबाजी में भी उनकी स्विंग कमाल की रही है. अंतरराष्ट्रीय मैचों के अलावा अन्य मुकाबलों में उन्हें कई मौकों पर दोहरी भूमिका निभानी पड़ी जिसका असर उनके फिटनेस पर पड़ा और करियर खासा प्रभावित हो गया.

सबसे अमीर गैर भारतीय क्रिकेटर

अंतरराष्ट्रीय करियर में आने के बाद उन्हें क्रिकेट जगत में असली पहचान इंडिनय प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने दिलाई. 2008 से शुरू हुए आईपीएल में उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए अपने लाजवाब प्रदर्शन की बदौलत उन्हें ऑस्ट्रेलियाई वनडे टीम में जगह मिली और खुद को एकदिवसीय क्रिकेट में ओपनर की भूमिका के रूप में स्थापित कर लिया.