आमों की कई प्रजाति है बाग में 

आमों की कई प्रजाति है बाग में 

भानु प्रताप ग्रेजुएट हैं और पहले वो नौकरी करते थे। उनके पास 50 एकड़ में आम का बाग है जिसे वो ठेके पर देते थे। भानु प्रताप बताते हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री से प्रेरित होकर नौकरी छोड़ दी और खुद बागवानी शुरु कर दी। उनका कहना है कि ठेके पर बाग देने पर जहां उन्हें 15 लाख रुपए तक ही मिल पाते थे। वहीं अब वो जब खुद बागवानी कर रहे हैं तो उनकी आय दोगुनी हो गई है। भानु की एक सोच ने आम के बाग़ को ठेके पर न उठाकर स्वयं ही उसकी देखभाल शुरू की और बागवानी में खाद, पानी, दवा का छिड़काव करके आम की फसल को तैयार किया है। आज उनके बाग का आम दिल्ली, कोलकाता, बिहार, यूपी के कई जिलों की मंडियों में सप्लाई हो रहा है। पचास एकड़ में फैले इस बाग़ में पंद्रह सौ फलदार पेड़ मौजूद हैं जिसमें लंगड़ा, बम्बईया, चौंसा, फजली, दशहरी जैसे आम की भरमार है। भानु प्रताप के सहयोगी भी उनका पूरा साथ दे रहे हैं। भानु प्रताप की अपनी निजी गौशाला भी है जिसके गोबर से तैयार खाद आम के बाग में लगाई जाती है।

जैविक खेती की ओर बढ़ाया कदम

भानु प्रताप अब जैविक खेती में भी कदम रख रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से मदद मांगी है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक भी इस मामले में उनकी मदद कर रहे हैं