सार्क के अस्तित्व को बचाये रखना हम सबका कर्तव्य

सार्क के अस्तित्व को बचाये रखना हम सबका कर्तव्य ये कहना है नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड का   प्रचंड  ने कहा कि उनका देश सार्क को पुनर्जीवित करने के साथ ही इसके स्थगित सम्मेलन को जल्द-से-जल्द आयोजित कराना चाहता है। उनके इस बयान से सार्क को लेकर एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है। भारत के सियासी और राजनयिक दायरे में दक्षिण एशियाई देशों के इस क्षेत्रीय संगठन को लगभग भुला ही दिया गया है। हालांकि इलाके के कई देशों में सार्क के नाम पर बहुत तरह की गतिविधियां चल रही हैं।
जैसे, बीते मई में कोलंबो में 8वें सार्क फिल्म महोत्सव का आयोजन संपन्न हुआ। प्रचंड से पहले पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान भी सार्क सम्मेलनों का रुका हुआ सिलसिला फिर से शुरू करने की मंशा जता चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा वह इस वर्ष सार्क शिखर बैठक इस्लामाबाद में ही करवाने की कोशिश करेंगे। भारत भी इस सिलसिले को दोबारा शुरू करने के पक्ष में है लेकिन वह चाहता है कि इसका आयोजन श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में हो। पिछला 18वां सार्क शिखर सम्मेलन काठमांडू में 2014 में हुआ था। उसके बाद 19 वां सार्क शिखर सम्मेलन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में नवंबर, 2016 में होना तय था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उसमें हिस्सा लेने पर सहमति जताई थी, लेकिन उसके पहले जनवरी, 2016 में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों ने भारत के पठानकोट वायुसैनिक अड्डे पर हमला कर दिया। उसके बाद भारत-पाक रिश्तों में लगातार तल्खी आती गई और अंतत: सार्क शिखर बैठक से पहले पाकिस्तान और नेपाल को छोड़कर बाकी सभी सदस्य देशों ने तनावपूर्ण माहौल में सम्मेलन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए इसका बहिष्कार कर दिया था। तभी से सार्क सम्मेलन स्थगित है।
इधर बिम्सटेक में भारत की बढ़ती सक्रियता को देखकर यह कहा जाने लगा है कि भारत सार्क को अप्रासंगिक बनाने के लिए ही इसे मजबूती दे रहा है। इस तरह का संदेश जाना भारत के लिए अच्छा नहीं है। दोनों संगठनों की अपनी भूमिका है। दक्षिण एशियाई देशों के लिए सार्क का विशेष महत्व है और भारत ने इसे हमेशा महत्व दिया है। आज जब विश्व में एकाधिकारी और संरक्षणवादी प्रवृत्तियां नए सिरे से सिर उठा रही हैं, तब सार्क जैसे क्षेत्रीय संगठन की भूमिका और भी बढ़ जाती है। विभिन्न देशों में राजनयिक तनाव के बावजूद इस संगठन के जरिये लेखकों-कलाकारों और छात्रों के बीच संवाद विकसित हुआ