हिन्दी हैं हम वतन हैं


भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के खंड 1 में वर्णित किया गया है कि भारतीय संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी ।संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए अंको का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय होगा। खंड 2 में यह उपबंध किया गया की प्रारंभ के 15 वर्ष की अवधि तक अर्थात 26 जनवरी 1965 तक संघ के सभी सरकारी कार्यों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग पूर्व की भांति होता रहेगा। भारत एक बहुभाषी देश है जहां पर विभिन्न भाषाएं विभिन्न प्रदेशों में बोली जाती हैं भारत के संविधान में ही 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है परंतु इनमें से हिंदी सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। अधिकारिक रूप से 14 सितंबर 1949 को इसे संविधान सभा द्वारा राजभाषा का दर्जा दिया गया। राजभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रुप में मनाया जाता है। वर्तमान में बोलने वालों की संख्या के अनुसार पूरे विश्व में चीनी भाषा मंडारिन के बाद , हिंदी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है परंतु फिर भी यहां संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा नहीं बन पाई है। भारत द्वारा प्रचारित योग को 170 देशों के द्वारा समर्थन मिला , क्या ऐसा संभव नहीं है कि भारत हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में दर्जा दिलाने के लिए 129 देशों का समर्थन जुटा सके इस पर हमारी सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 25 करोड़ लोग हिंदी का अखबार पढ़ते हैं और केवल सिर्फ सवा दो करोड़ लोग ही अंग्रेजी का अखबार पढ़ते हैं परंतु फिर भी हमारे देश में हिंदी को जो सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि स्कूल से लेकर कॉलेज कार्यालयों तक अंग्रेजी भाषा को कामकाज से लेकर बोलने तक में प्राथमिकता दी जाती है आज अभिभावक , शिक्षक  लिखित और मौखिक रूप से अंग्रेजी सीखने पर जोर दे रहे हैं। क्योंकि उनका यह मानना है कि नौकरी प्राप्त करने में अंग्रेजी से काफी मदद मिलती है परंतु यह भारत का दुर्भाग्य ही है कि अपनी मातृभाषा को छोड़कर वह अंग्रेजी भाषा को तरजीह दे रहा है। बहुत से लोग सिर्फ इसलिए नौकरी प्राप्त करने का अवसर खो देते हैं क्योंकि वह अंग्रेजी को धाराप्रवाह बोल नहीं पाते हैं ।इसलिए सरकारों को हिन्दी भाषियों के लिए रोजगारों ,साक्षात्कारों में हो रहे भेदभाव को समाप्त करना चाहिए।आजकल हमारे बच्चे भी एक अलग मानसिकता के साथ पढ़ रहे हैं, उनका मानना है जिनकी अंग्रेजी अच्छी होती है वे सब कुछ जानते हैं और जो लोग अंग्रेजी नहीं जानते हैं वह लोग कमतर माने जाते हैं ।हमें इस मानसिकता को बदलना होगा , वरना इसके भविष्य में गंभीर परिणाम होंगे।  हिंदी  दिवस पर हम अपनी मूल पहचान को याद करते हैं। यह हिंदी हमें एकता के सूत्र में बांधती है और देश के लोगों को राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करती है। इतिहास गवाह है जिस राष्ट्र की अपनी भाषा और संस्कृति नहीं होती है वह राष्ट्र विकास की दौड़ में पीछे रह जाता है। हमें अपनी संस्कृति को समझने के लिए हिंदी की जानकारी होना बहुत जरूरी है सच तो यह है की हिंदी अब पहले से ज्यादा समृद्ध हो रही है क्योंकि अब मल्टीनेशनल कंपनी भी अपने विज्ञापनों में हिंदी स्लोगन का उपयोग कर रही हैं जैसे यह दिल मांगे मोर , ठंडा मतलब कोका कोला , जो बाजार पर पकड़ बनाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं अर्थात आर्थिक जगत में भी हिंदी का महत्व बढ़ रहा है ।आज इंटरनेट , विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी ने अपने आपको काफी सशक्त किया है क्योंकि भारत एक बहुत बड़ा बाजार है इसलिए विश्व के कई देशों का झुकाव हिंदी भाषा की तरफ बढ़ रहा है। हमारे देश के अतिरिक्त पाकिस्तान , फिजी, मारीशस , गुयाना , सूरीनाम , नेपाल आदि में भी हिंदी बोली जा रही है ।आज प्रवासी भारतीय बहुत बड़ी संख्या में विभिन्न देशों में हैं जहां बड़ी संख्या में हिंदी बोली जा रही है अमेरिका दक्षिण अफ्रीका सिंगापुर युगांडा कनाडा न्यूजीलैंड ब्रिटेन जर्मनी आदि ऐसे ही देश है। हिंदी की विशेषता यह है की यह सबसे व्यवस्थित भाषा है अर्थात हम जो भी हिंदी में लिखते हैं , वही बोलते हैं और उसका मतलब भी वही होता है। जबकि अन्य भाषाओं में ऐसा नहीं है। यह भाषा बोलने में सबसे सरल और लचीली होती है। इसे बोलना और समझना बहुत आसान है ।यह दुनिया की एकमात्र ऐसी भाषा है जो सबसे अधिक और तेजी से प्रसारित हो रही है इस भाषा में ग़लतियाँ न के बराबर हैं ।इसका शब्दकोश भी बहुत बड़ा है। इसको लिखने के लिए देवनागरी लिपि का प्रयोग किया जाता है जो की पूरी तरह से वैज्ञानिक है। विश्व में हिंदी भाषा की भूमंडलीकरण के दौर में मांग बढ़ी है इसलिए गूगल जैसे सर्च इंजन ने भी 2009 से हिंदी भाषा को अपना लिया। और गूगल भी है मानता है कि यह अन्य भाषाओं के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है। इंटरनेट की दुनिया में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है आज फेसबुक , ट्विटर , व्हाट्सएप , इंस्टाग्राम पर हिंदी का प्रयोग बहुतायत किया जा रहा है। भारतीय साहित्य के शिरोमणि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कहा था कि अपनी मूल भाषा से ही तरक्की हो सकती है क्योंकि मातृभाषा ही सभी उन्नतियों का मूल आधार है। मात्र भाषा के ज्ञान के बिना किसी के हृदय की पीड़ा का निवारण संभव नहीं है । हमें विभिन्न प्रकार की कलाएं , शिक्षायें , ज्ञान सभी देशों से लेने चाहिए परंतु उनका प्रचार-प्रसार अपनी राष्ट्रभाषा में ही करना चाहिए।हिन्दी भाषा हमारे देश की धरोहर है , अपने राष्ट्र ध्वज तिरंगे के समान राष्ट्र भाषा हिन्दी का भी सम्मान करना चाहिए। तभी हमारा देश , हिन्दी हैं हम वतन हैं , हिन्दोस्तां हमारा , की भावना के साथ वास्तविक रूप से सशक्त हो सकता है।