लखनऊ मेट्रो संचालन,के साथ दे रहा लोगो में सामाजिक सन्देश भी ।

लखनऊ, में दौड़ती लखनऊ मेट्रो, कल्पना से परे निचे सड़को पर दौड़ते लाखो वाहन और उनसे निकलता जहर शायद इन सब चीजों को देखते हुए यहाँ पर लखनऊ मेट्रो को चलाने का फैसला किया गया और लखनऊ मेट्रो आज हमारे बीच में है । और हजारो लोग इससे सफर भी कर रहे है । जिसमे स्कूल के बच्चे, महिलाये, और दिव्यांग । लखनऊ मेट्रो सिर्फ एक रेल संचालन तक ही नहीं सीमित है बल्कि एक पूरा विषय जिसमे, पर्यावरण,इंजीनियरिंग,भूगोल,सामाजिक सन्देश,ट्रैफिक,सफाई प्रबंधन जैसे सेकड़ो तरह की चीजो के बारे में लोगो को जागरूक करना लखनऊ मेट्रो का कार्य क्षेत्र अपने सञ्चालन के पहले दिन के साथ ही एक सामाजिक मंच के रूप में भी लोगो के सामने उभर के आया है लोगो को रेल की यात्रा से जुड़े तौर तरीके टीवीऍम ,एटीऍम मशीनों का प्रयोग किस तरह से करना है । इसके बारे में बताना और साथ दूसरी तरफ समाज में चल रहे उन जरूरतों पे भी बात किया है जिनमे सबसे प्रमुख महिलाओ की सुरक्षा, दिव्यांग व्यक्तियों,और बुजुर्ग लोगो के लिए हमेशा फिक्रमंद दिखा है । वही इंजीनियरिंग,पॉलिटेक्निक,स्कूल, ऍम.बी.ए और यूनिवर्सिटी के छात्रों का बदस्तूर भ्रमण जारी है शायद ये विचार कई लोगो के मन में आये की मेट्रो तो एक इंजीनियरिंग वर्क है जो है भी पर लखनऊ मेट्रो एक सामाजिक जिम्मेदारियों का भी सन्देश दे रहा है और यही बात यूनिवर्सिटी के बी.ए,बी एस.सी ,सामाज शास्त्र, के छात्रों के काम की भी है ।

एलऍमआरसी के प्रबंधन निदेशक श्री कुमार केशव जी ने इस चीज को पहले से ही अपने जहन में रखा होगा की लखनऊ मेट्रो भारत की सबसे अलग दिखने वाली रेल होगी और उनकी टीम ने इस कठिन प्रयास को साकार कर दिखाया ,लखनऊ मेट्रो रेल पर दिखती लखनऊ की पहचान, गौर से देखिये हम कहते है एकी मुस्करिये आप लखनऊ में है लेकिन लखनऊ मेट्रो बड़ी खूबसूरती से मुस्करा कर हर वक्त आप का इस्तिक्बाल कर रही है । जो की ट्रेन के मुख पे साफ दिखती है इसकी कथक कलि जैसी आँखें इसके डिब्बो पे उक्रित यहाँ की प्रसिद्ध चिकेन कारी, ट्रेन के अंदर दिव्यांग लोगो के लिए एक सुनश्चित स्थान ,महिलाओ की उनकी यात्रा से जुडी सुरक्षा सम्बंधित सुविधाये भी व्यस्था मेट्रो में दी गयी है जिसे टॉक बैक प्रणाली कहते है ,इसके माध्यम से आप ट्रेन ऑपरेटर से सीधे बात कर सकते है और अपनी समस्या को अवगत करा सकते है ।

लखनऊ मेट्रो के सभी स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरा ,टैकटाइल पाथ हर प्रमुख स्थान पर लगाये गए है साथ ही अक्षम लोगो के लिए व्हील चेयर की व्यस्था भी मेट्रो ने कर रखी है ।

उत्तर प्रदेश की लखनऊ पीएसी पुलिस के जवान और मेट्रो की भी अपनी सिक्यूरिटी स्टाफ जिसमे पुरुष,महिलाएं दोनों की संयुक्त साझेदारी से रेल सञ्चालन की सुरक्षा में तैनात किये गए है । मेट्रो के कार्य प्रणाली इसके प्रबंधन से काफी कुछ सिखा जा सकता है जिस तरह से निर्माण कार्यो के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन,साफ सफाई पे ध्यान देना नियमित तौर पर पानी का छिडकाव करना जैसे चीज है सरकारी महकमो ने भी मेट्रो निर्माण कार्य को देख कर अपने अमल में लाया और सडक वाले कार्यो पर सुरक्षा के लिहाज से अब लोहे के बाड़ो को लगा कर काम करते दिख रहा है ।

सच मेट्रो एक रेल सुविधा ही नहीं एक पूरा प्रबंधन है जिस से हम बहुत कुछ सीख रहे है और सीख सकते है एबहुत कुछ हैए इसके अंदर नहीं घूमे है तो शुरु कर दीजिये आज से ही लखनऊ मेट्रो के इस सुरक्षित और सुकून के सफर को और कर ले इसको अपनी आदत में शुमार ।