दीपावली के अवसर पर पटाखों आदि के प्रयोग से होने वाले वायु व ध्वनि प्रदूषण नियन्त्रण हेतु मा0 सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने के निर्देश।

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     अपर जिलाधिकारी (नगर)/ प्रभारी अधिकारी (आयुध) श्री के0पी0 सिंह, ने अवगत कराया है कि दीपावली के अवसर पर पटाखों आदि के प्रयोग से होने वाले वायु व ध्वनि प्रदूषण नियन्त्रण हेतु मा0 सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराये जाने हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि पटाखों के फटने के स्थान से 4 मीटर की दूरी पर 125 डी0बी0 (ए0आई0) अथवा 145 डी0बी0 (सी0) पी0के0 से अधिक ध्वनि तीव्रता उत्पन्न करने वाले पटाखों का उत्पादन एवं विक्रय निषिद्ध किया जाय। श्रेणी युक्त एकल पटाखों (संयुक्त पटाखों) के मामले में उक्त सीमा 5 लॉग 10 (एन0) डेसीबल तक कम की जाय, जहां (एन0) एक साथ संयुक्त पटाखों की संख्या है।
     मा0 सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में सायं 08 से रात्रि 10 बजे तक की अवधि को छोड़कर पटाखें/आतिशबाजी के प्रयोग की अनुज्ञा नहीं दी जायेगी। शान्त क्षेत्र में किसी भी समय पटाखे नहीं छोड़े जायेंगे। शान्त क्षेत्र अस्पताल, शैक्षिक क्षेत्र, न्यायालय, धार्मिक स्थल या सक्षम प्राधिकारी द्वारा घोषित अन्य किसी क्षेत्र से 100 मीटर की परिधि का क्षेत्रफल होगा। बच्चों को “ैंल दव जव बतंबामते“ (पटाखे नहीं चाहिये) का नारा बुलन्द करने के लिए प्रोत्साहित किया जाय। प्रिंट एवं इलैक्ट्रोनिक मीडिया में विज्ञापन का प्रकाशन किया जाय। पुलिस अथारिटीज को साउण्ड मीटर्स उपलब्ध कराया जाय। पटाखों की बिक्री का लाइसेन्स देते समय उनकी गुणवत्ता की जांच किया जाय। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों से उक्त बिन्दुओं का परीक्षण कराकर शीघ्र नियमानुसार कार्यवाही करने तथा कृत कार्यवाही से 03 दिवस में उन्हें अवगत कराने की अपेक्षा की है।
     अपर जिलाधिकारी (नगर) ने बताया है कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार के अर्द्धशा0प0सं0-एच0-11018/1/23001/सीपीए (वॉल्यूम- 4) दिनांक 11 अक्टूबर 2004 द्वारा यह अपेक्षा की गई है कि रिट पिटिशन संख्या-72/ 1998 में मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 27 सितम्बर 2001 तथा 10 सितम्बर 2003 का कड़ाई पूर्वक अनुपालन कराया जाय और अनुपालन आख्या उपलब्ध करायी जाय। भारत सरकार के उक्त पत्र में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से ध्वनि प्रदूषण के खतरों से आम जनता को अवगत कराने की कार्यवाही करने की अपेक्षा की गयी है। दीपावली के अवसर पर ध्वनि प्रदूषण की नियमित जांच कराने तथा ध्वनि प्रदूषण पर लगाए गये नियंत्रणों से प्राप्त होने वाले परिणामों की समीक्षा करने की अपेक्षा की गयी है।