रेडक्रास के प्रतीक चिन्ह  का धड़ल्ले से हो रहा दुरूपयोग–

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(जुबेर अहमद”टीटू”)
!  एम्बुलेन्स, मेडिकल स्टोर, चिकित्सकों के हाथों गिरवी हुआ प्रतीक चिन्ह।
सुलतानपुर/ जिले में इण्डियन रेडक्रास सोसाइटी का प्रतीक चिन्ह का व्यापक पैमाने पर दुरूपयोग हो रहा है । अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर 1863 में गठित इण्टरनेशनल कमेटी आफ रेडक्रास का विस्तार होते हुए भारत में 1920 में इण्डियन रेडक्रास सोसायटी का गठन हुआ और उत्तर प्रदेश में 1921 में इसकी स्थापना हुई । रेडक्रास का प्रतीक चिन्ह लाल रंग में $ निशान निर्धारित हुआ । जिसका उपयोग केवल रेडक्रास सोसायटी ही कर सकती है । किन्तु जिले में व्यापक पैमाने पर रेडक्रास के प्रतीक चिन्ह $    का दुरूपयोग हो रहा है।
इतनी पुरानी संस्था का प्रतीक चिन्ह $ आज जिले के चिकित्सकों, मेडिकल स्टोरों, एम्बुलेन्सों के हाथ रेडक्रास सोसायटी ने गिरवी रख दिया है । राज्य स्तर पर इण्डियन रेडक्रास सोसायटी का अध्यक्ष राज्यपाल तो जिला स्तर पर अध्यक्ष जिलाधिकारी होता है। फिर भी संस्था के प्रतीक चिन्ह लाल रंग के $ का उपयोग दूसरे लोग करें यह हैरानी की बात है। इस समय जिले जिले में इण्डियन रेडक्रास सोसायटी के चेयरमैन डॉ0 डी0एस0मिश्र तो सचिव जे0पी0शुक्ल हैं। पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी विवेक हैं। इस सम्बन्ध में जब इण्डियन रेडक्रास सोसायटी के सचिव से जब बात की गयी तो जबाब देने में टालमटोल करते दिखे। उनसे जब यह पूछा गया कि रेडक्रास का प्रतीक चिन्ह $ कौन-कौन इस्तेमाल कर सकता है तो उनका कहना था कि रेडक्रास का प्रतीत चिन्ह लाल रंग का $ केवल रेडक्रास संस्था ही इस्तेमाल कर सकती है। युद्धक्षेत्र में घायलों को सहायता पहुंचाने के काम में भी रेडक्रास के प्रतीक चिन्ह लाल रंग के $ का उपयोग सेना कर सकती है। हैरानी वाली बात यह है कि इतने महत्वपूर्ण संस्था के प्रतीक चिन्ह पर लोगों द्वारा डाका डाला गया है या रेडक्रास संस्था द्वारा इनके हाथ प्रतीक चिन्ह $ गिरवी रख दिया गया है और इसके लिए कोई आवाज उठाने वाला नहीं है। जिलाधिकारी व राज्यपाल तक ऐसे महत्वपूर्ण मामले में मौन साध बैठे हैं। जबकि रेडक्रास के प्रतीक चिन्ह $ का दुरूपयोग करने पर 500 रूपये के जुर्माने का भी प्राविधान है । यही दो बार की नोटिस के बाद भी यह प्रतीक चिन्ह का उपयोग करते पाये जाने पर वह सम्पत्ति रेडक्रास के पक्ष में जब्त करने का भी प्राविधान है । लेकिन इतने कड़े प्राविधानों के बावजूद भी धड़ल्ले से दुरूपयोग हो रहा है। शासन-प्रशासन इस मामले पूरी तरह उदासीन है । पढ़े लिखे जिम्मेदार लोग भी रेडक्रास जैसी संस्था के बारे या तो कुछ जानते नहीं हैं या पूरे कुंए में भांग पड़ी हुई है । यह ज्वलन्त प्रश्न बन गया है कि आखिर रेडक्रास के प्रतीक चिन्ह $ का दुरूपयोग रूकेगा कैसे