साक्षात्कार


कौशिकी त्रिपाठी

पहले राजनीतिक पार्टियां विकास की बात करती थी और आज लोगों को बड़े ही बेअदब तरीके में एक-दूसरे पर छीटाकशीं और टीका-टिप्पणी करने से फुरसत नही मिलती। लखनऊ का मिज़ाज इस तरह का नही है कि यहां पर बाहर से आए लोग यहां के माहौल को गंदा करें और यहां की जुब़ान में बेअदबी का रंग घोलें। राजनीतिक पार्टियां को चाहिए कि वो विकास की बात करें अपनी उपलब्धियां बताए और जो कमियां रह गयीं उनको दोबारा सरकार बनने पर पूरा करने का जनता से वादा करें ़ ़ ़ये कहना है लखनऊ के नवाब मसूद अब्दुल्लाह का। ऑडिशन टाइम्स की कौशिकी त्रिपाठी ने चुनावी माहौल को लेकर नवाब मसूद अब्दुल्लाह से कुछ गुफ्तुगु की। पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल- लखनऊ में हो रहे बदलाव को आप किस तरह देखते हैं?
जवाब- बहुत कुछ बदल गया है। नवाब सिराजउद्दौला , नवाब आसिफद्दौला, नवाब वाजिद अली शाह, बेगम हजरत महल इन सभी ने जो नफासत, अदब, तहजीब, विरासत के रूप में लखनऊ को दी बड़े अफसोस की बात है कि आज उसी विरासत को हम खोता हुआ देख रहे हैं।

सवाल- किस सरकार ने लखनऊ के विकास पर सबसे ज्यादा दिया?
जवाब-आज के दौर में एक चीज़ ये देखने को मिल रही है कि नेताओं के नाम पर सरकारी इमारतों का नाम रखा जा रहा है जबकि पिछली सरकार अखिलेश यादव जी की सरकार में लखनऊ चिड़ियाघर को नवाब वाजिद अली शाह के नाम से पहचाने जाने का निर्देश दिया गया। इसी तरह मायावती जी की सरकार में बेगम हजरत महल पार्क को पहचान देने का निर्देश दिया गया। इन दो जगह के अलावा कोई ऐसे ऐतिहासिक स्थल नहीं जो किसी नवाब या उन लोगों के नाम से जानी जाती हो जिन्होंने यहां को लखनऊ बनाने के लिए अपनी अहम भूमिका निभायी है।
सवाल-लखनऊ की गंगा-जमुना तहजीब को बचाए रखने के लिए हमें किन पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है?
जवाब-सबसे अहम बात की कि हमें अपनी जुबान पर ध्यान देने की जरूरत है, आज के बच्चे बड़ों का अदब करना भूल से गए हैं।हमारी गंगा – जमुनी तहजीब की जहां तक बात है तो जिस भाईचारे के लिए हमारा लखनऊ पूरे विश्व में जाना जाता है वो भाईचारा खत्म हो रहा , वो विरासत खत्म हो रही है। इतना ही जो हमारी सांस्कृतिक धरोहरें हैं उनके रख-रखाव पर ढंग से ध्यान नही दिया जा रहा है। तो इन सब पहलुओं पर हमें सोचने की जरूरत है।
सवाल- पहले के चुनावी माहौल और वर्तमान के चुनावी माहौल में आप किस तरह का बदलाव देखते हैं?
जवाब- पहले राजनीतिक पार्टियां विकास की बात करती थी और आज लोगों को बड़े ही बेअदब तरीके में एक-दूसरे पर छीटाकशीं और टीका-टिप्पणी करने से फुरसत नही मिलती। लखनऊ का मिज़ाज इस तरह का नही है कि यहां पर बाहर से आए लोग यहां के माहौल को गंदा करें और यहां की जुब़ान में बेअदबी का रंग घोलें। राजनीतिक पार्टियां को चाहिए कि वो विकास की बात करें अपनी उपलब्धियां बताए और जो कमियां रह गयीं उनको दोबारा सरकार बनने पर पूरा करने का जनता से वादा करें।
सवाल-महागठबंधन 2019 के चुनाव में कितना प्रभावी सिद्ध होगा?
जवाब प्रभाव तो डालेगा ही इस चुनाव में। कुछ जगहों पर महागठबंधन के उम्मीदवार उतने मजबूत नही हैं, हां कुछ जगहों उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर देंगे। आज का मतदाता समझदार है वो ये जानता है कि कौन पार्टी और उसका उम्मीदवार विकास की बात कर रहा है। बाकी तो 23 तारीख को पता ही चल जाएगा।

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