खनन माफिया प्रशासन को देता है मोटी रकम जिससे नहीं होती है कोई कार्रवाई



शाहाबाद  तयशुदा रकम प्रतिमाह देने के बाद ही होता है खनन  तहसील और पुलिस प्रशासन का पनाहगार बने खनन माफिया दिन दहाड़े मिट्टी को अच्छी कीमतों पर बेच रहे हैं। प्रशासन को सड़कों के किनारे हो रहा मिट्टी के अवैध खनन दिखाई नही पड़ रहा है। मिट्टी के अवैध खनन पर राजस्व विभाग से लेकर पुलिस विभाग सबके सब मौन हैं। ऐग्वां जाने वाली सड़क सहित दर्जनों स्थानों  पर जेसीबी मशीन से हो रहे खनन की सूचना होने के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं खुलती। चूंकि मिट्टी के अवैध खनन की जानकारी तहसीलदार अबधेश कुमार को है।बतातें चलें कि एक माह पूर्व यहीं पर जेसीबी से हो रहे खनन पर खनन अधिकारियों ने मिट्टी माफिया की 4 ट्रैक्टर ट्राली पकड़कर चालान किया था।उसके बाद कुछ दिनों तक अवैध खनन बन्द रहा लेकिन एक हफ्ते से पुनः शुरू कर दिया गया जो लगातार जारी है।दिन दहाड़े जटपुरा गांव सहित आस पास के इलाकों में जेसीबी द्वारा मिट्टी का अवैध खनन होता है।बताया गया है कि अधिकारियों से बात करने के बाद ही वह खनन माफ़िया मिट्टी खनन को अंजाम दे रहे है।विदित हो कि उक्त स्थान पर काफी समय से मिट्टी का अवैध खनन किया जाता रहा है।खनन माफियाओं के इस खेल में राजस्व विभाग के अलावा पुलिस विभाग के अफसरान भी शामिल हैं।क्योंकि क्षेत्र में हो रहे खनन के खिलाफ कई बार कार्यवाही भी की गई।लेकिन अवैध मिट्टी खनन करने वालों में कुछ तो फितरत है कि उन्हें दुबारा खनन का मौका मिल जाता है और वह लगातार धरती का कलेजा निका लने में व्यस्त रहते हैं।वहीं प्रशासन द्वारा खनन के बारे मे कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।जिसके कारण मिट्टी माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं और वह लगातार धरती का विनाश करने पर उतारू हैं।मिट्टी के अवैध खनन पर लोंगो का कहना है कि 40 हजार प्रतिमाह तहसील और पुलिस विभाग के अधिकारियों को देना पड़ता है।जिसमे 20 हजार पुलिस और 20 हजार तहसील विभाग लेकर ही खनन की इजाजत देता है।