सौरभ राय

सिर्फ अवसरों पर नहीं हर .अवसर पर करे बात आये सब साथ

एक कल्पना कर के देखिये जब सृष्टी का निर्माण हुआ होगा तो इसकी गोद में क्या नहीं होगा स्वच्छ वातावरण,निर्मल पानी,स्वच्छ हवा,पेड़ो से भरे हरे भरे जंगल,चारो तरफ हरी भरी वादिया पहाड़ो से गिरता झरने का पानी कल कल बहती नदिया ,खुले मैदान,मजबूत पहाड़,जीव जंतु जानवर,पंछी सब थे ।इस पृथ्वी की रौनक और मानव जीवन को बनाये रखने में इनका बहुत बड़ा सहियोग है जो आज तक बना हुआ पर धरती पर धीरे धीरे जैसे मानवों की संख्या साल दर साल बढती चली गयी फिर ऐसी कई त्रासदिया भी आई जब गाँव ही नहीं शहर तक भी नहीं बचाये पाए अपनी साख प्रकृति के प्रकोप से,हर सदी में महान लोग पैदा हुए उन्होंने कई चीजों पर अपनी बात कही पर प्रकृति को बचाए रखने और इसकी महत्व्तता को सभी ने समय दर समय समझा और लोगो को भी आगाह और समझाते रहे की जल,जमीन और जंगल जब यह सभी रहेंगे अपने अस्तित्व में तभी बना रहेगा धरती पर हम मानवो का जीवन मंगल ।

हम कही दूर और दुसरे देश को ना देखे जबकी मै किसी के विरोध में नहीं हर देश अपने नागरिको पर्यावरण वातावरण और साथ ही अपने जमीन के लिए बहुत जागरूक और सवेंदनशील रहा है भारत का जो क्षेत्रफल दुनिया के कुछ देश को छोड़ दे तो और देश के क्षेत्रफल इतने बड़े पैमाने पर नहीं फैले हुए है और दूसरी सबसे बड़ी बात चाइना और भारत जनसँख्या में दुनिया में सबसे ऊपर यह एक बहुत गंभीर स्तिथि से दोनों देश गुजर रहे कही ना कही जनसँख्या और इससे हमारे धरती पर पड़ता इसका नकारात्मक परिणाम भी अब सामने आ रहा कश्मीर की वादिया जो ठण्ड से सरोबोर डूबी रहती थी यहा भी अब गर्मी दिखने लगी है ।राजस्थान,शिमला,ऊटी,देहरादून,नैनीताल,और इसके साथ भारत के कई राज्यों के शहर इन सब जगहों के मौसम अपने मूल्य पहचान से इतर अब यहा पर भी विपरीत मौसम और वातावरण पर इसका अनुकूल प्रभाव देखने को मिल रहा जो की एक चिंता का विषय है पहाड़ो की तरफ लोगो का रुख अब ज्यादा हो रहा जबकी दिन रात अब इन पहाडियों की वादियों में लोग अपनी गाडियों से दिन रात घुमने आ जा रहे प्रदुषण और शोर जो कभी यह पहाड़ कभी इन सब चीज के आदि नहीं थे इनकी चट्टानें अब ऐसे ही नहीं चटकने लगी और दरक दरक कर गिर रहे पहाड़ गाडियों की आवजाही और शोर इसकी एक प्रमुख वजह हमने अपनी सुविधाओ के लिए क्या नहीं किया इनके भविष्य को दूर तक देखे और समझे तो एक नकारात्मक छवि उभर कर सामने आती दिखाई देने लगती है इनके अस्तित्व सही बना रहेगा की नहीं इसमें कम दोष उन राज्य सरकारों का भी नहीं जो की अपने वहा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इसके कठिन मार्ग को आसान बनाने के लिए पहाड़ो की छातिया समय समय पर काटी जाती रही और कितनी उचाई पर अभी हमको और इन पहाड़ो को देखने जाना है क्यों नहीं हम समझते इनकी उचाई परत दर पर कम हो रही है ।इनकी सुन्दरता को ना बिगाड़ो यह पहाड़ संतुलन है।कुछ ऐसा ढांचा क्यों नहीं तैयार करती की सब अपनी गाडियों से नहीं एक स्थान के बाद टूरिस्ट बस से सबको ले जाया जाये जिससे कुछ कम दबाव बना रहे इन पहाड़ो के मार्गो पर जाहिर है मछली को पानी से बाहर कुछ ज्यादा देर तक रखे तो स्वाभाविक है वो मर जाएगी ठीक उसी तरह से इन पहाड़ो पर इंसानों की बराबर आवाजाही बनी रही तो इनमे परिवर्तन होगा यह पहाड़ ही है आकाशीय बिजली जब गिरती है तो यह पहाड़ ही जो पहले इन्हें अपने ऊपर लेते मानवों और धरती के ऊपर गिरने से रोकने में यह हमेशा से अग्रणी रहे है क्या कभी हमने सोचा इस बारे में आज क्या हाल हो रखा गाँव के तालाबो का और उन नदियों का जो सुख गए हमारे ना ध्यान देने की वजह से तालाब पोखरो की मीटिया निकल ली हमने क्योंकी इनकी मीटिया इतनी ठंडी होती है की लोग अपने घरो में इसको लिपते है जिससे घर साल भर ठंडा बना रहे और कई तालाब पर खेत बन गए जब वो सुख रहे थे तो क्यों किसी ने उस तरफ अपना ध्यान दिया उसे बचने में सूखने से और कई गावो में पोखरो का पानी इतना गंदे हो चुके है की इंसान की बात दूर जानवर भैस गाय तक भी नहीं जाती अब इन तालाबो में अब नहाने के लिए भारत की कई नदियो का स्वरुप क्या था अब इनका रूप देख लीजिये बस एक शब्द में इन नदियों का आकार जैसे की इंसान की 32 कमर जैसे होकर रह गयी कोई भी चाहे तो नदी चल कर पार कर ले गहराई तो इनमे रह ही नहीं गयी और तैरने का ख्याल ही मत लाइएगा अपने जहन में पहले हमारे पानी का श्रोत हुआ करते थे पोखरे,तालाब,नदी,झील झरने,इनमे से बहुत से पानी के श्रोत जो की अब सुख चुके और बहुत से अपने आखिरी पड़ाव की तरफ चल रहे फिर एक समय आया हाथ से चलने वाले हैंडपंप पर धीरे धीरे यह भी हमारे हाथो से छुट गए और अब तो कई स्थानों पर इनके धरातल भी सुख चुके मटके सुराही जो कभी गाँवो के हर घर में देखने को मिलते थे समय परिवर्तन के साथ यह भी फुट गए,अपनी तासीर को हम तरावट पहुचाने के लिए ले आये अपने घरो में फिर रेफ्रीजिरेटर,और एक तरफ पूरा बाजार पट्टा भरा प्लास्टिक बोतलों के भरे पानी से जिसको हम शुध पानी कहते और खरीद कर पी रहे साफ पानी हमने छोड़ा ही नहीं तो जिन्दगी इन पानी की बोतलों पर आज निर्भर हो चुकी है सबकी आज हर हाथ में स्मार्ट फोन के साथ एक बेबी फोन हम पर्सनल यूज के लिए रखते और एक तरफ मोबाइल बाजार में उछाल और इसकी वजह से हर तरफ टावर बढ़ते गए और हर घर कार्यालय ट्रेन बस प्रतिष्ठानों मौल को ठंडा बनाये रखने के लिए हमने लगा रखे एक दुसरे के लिए वातावरण को वातानुकूलित बनाए रखने के लिए ए.सी और इनसे निकलने वाले रेडिएशन और टावरो से निकलते फ्रीक्वेंसी का असर की आसमान और अपने अगल बगल हर समय दिखने वाले पंछी सब विलुप्तता की तरफ बढ़ चुके बहुत सी प्रजातिया तो अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी हमारे बीच से इन रेडिएशन और प्रदुषण की वजह से यह सब हमने अपने फायदों और प्रतिसिप्धा में खुद को आगे बनाये रखने के लिए किया और इसका नकारत्मक असर बेजुबान जानवर,पेड़,पंछी पर पड़ा और साथ ही इंसानों पर भी इसका असर पड़ा इससे बिलकुल इनकार नहीं किया जा सकता बढ़ते जान्संख्या के वाहनो में भी बढौतरी हुई और इनसे बढ़ता गया प्रदुषण इसका दुष्परिणाम,अस्थमा आँखों में जलन,हार्टअटैक और लंग्स की बीमारी के साथ कैंसर भी देखने को मिल रहा ।

कुछ दिन पहले अखबार में खबर पढने को मिली की लखनऊ में प्रदुषण के स्तर में कुछ कमी आई जिसकी एक वजह मेट्रो को भी राज्य प्रदुषण बोर्ड ने बताया यह एक अच्छी खबर सबके लिए थी की लोग जागरूक हुए और ज्यादा से ज्यादा अब मेट्रो का प्रयोग कर रहे मेट्रो की भी भरसक यही प्रयास हमेशा से रही और उसने ऐसे सभी आयोजन करने का मकसद की लोगो से ज्यादा रूबरू और मेट्रो से उनके होने वाले फायदे के बारे में जितना वो बता सके और इसका सुखद परिणाम देखने को भी मिला सभी को मालूम मेट्रो ने एक कम समय में अपने निर्माण के साथ शहर के प्रदुषण को कम करने में मेट्रो स्टाफ ने जो अपनी भागेदारी लखनऊ शहर में रखी वो सच काबिले तारीफ है।और इससे ऐसे ही बनाये रखने में सब को मिलकर और जितना हो सके हम मेट्रो के साथ साइकिल का भी प्रयोग करे पहले साइकिल जिनके पास हुआ करती थी वो मध्यम श्रेणी में आता था आज रहीस इसको चला रहे अपने स्वास्थ को सही रखने के लिए तुलना में अगर दोनों को देखे तो शुरू से जो इसका उपयोग करते आ रहा था उसका स्वास्थ ज्यादा अच्छा और स्फूर्ति होगी उसके अन्दर और जिन्होंने अभी कुछ सालो से साइकिल का प्रयोग कर रहे वो जिनको मधुमेह और ब्लड प्रेशर को सही बनाये रखने के लिए लोग अब साइकिल चला रहे आज हम सब भली भाति परचित है जैसे हालात हमारे सामने बने हए है प्रदुषण को लेकर फिर यह बाते जागरूकता सिर्फ इन खास दिवस पर ही हम क्यों मानते और और हम एकदम से जागरूक होने लग जाते यह तो दिखावा हुआ और दुसरे दिन से फिर सब चीजों को भूलकर हम गंदगी और प्रदुषण फैलाने लगते ऐसे कोई भी आयोजन कर सबको बुलाना और दुनिया को बताना की हम जागरूकता के लिए कदम बढ़ा रहे जबकि कुछ ही लोग अमल करते और बाकी तो मात्र नकल भर भी कर अमल करना शुरू कर दे तो कुछ हालात फिर सुधरने लग जाये चेत जाइये अभी से सब नहीं तो आने वाला हमारा कल के बहुत बुरे होने वाले है हालत ।

हम ने अपनी सुवाधियो के

लिए हर चीज को कर ली अपने मुताबिक मुफीद

दो कदम भी चलना ना पड़े

लेते है हम गाड़ियों का सहारा

फिर प्रदुषण से धरती में पैदा कर दी हमने बेदम गर्मी

और सूरज में बढ़ा दी हमने इतनी आग

की बिलबिला उठा शहर का गरीब

तलाशनी शुरू करी फिर उसने कोई जगह ऐसी

मिल जाये उसे जहा थोड़ी सी राहत,

पर मिली न खाक कोई ऐसी जगह पुरे शहर में उसे,

ना हुआ मय्सर एक बगीचा भी उस

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