कभी भगवन भक्तो को दुखी होने नही देते जैसे पितु मातु बच्चों को कभी रोने नही देते ,,गोविंदाचार्य

पचदेवरा हरदोई के  ग्राम कुरारी 11 जून को आयोजित   मद्भागवत  में कथा के तृतीय  दिवस गोविंदाचार्य जी ने  भगवान श्री कृष्ण की पावन कथा सुनते हुए कहा भगवान की भक्ति में मिलने बाला दुख दुख नही सबसे बड़ा सुख है और  श्री कृष्ण का बचन हम सभी को मानना चाहिए क्योंकि उन्होंने जो गीता में भागवत  में उपदेश किया वहा मानने योग्य है  भागवत में 24 अवतारों का बखान किया व्यासः जी ने किंतु मात्र दो अवतार पूरे है एक श्री राम जीका और दुशरे कृष्ण जी का और सब अवतार अधूरे क्योकि भगवन राम का लीला अवतार है और कृष्ण का भी लीला अवतार है एक बात है लीला अवतार में भक्ति का महत्तम अधिक है जब तक जीवन मे भक्ति नही होगी राम कृष्ण की कृपा प्राप्त नही होगी इसलिए बहुत जरूरी है जीवन मे भक्ति जैसे भगवन का भक्त, भक्ति स्वतंत्र सकल गुण खानी बिनु सत्संग न पावहि प्रनी प्रहलाद ध्रुव आदि आदि ये सभी भक्त अपने जीवन के डोर भगवान को समर्पित कर चुके थे तभी तो इन सभी बाल बाक नही हुआ  जब धुर्व जी को सौतेली माता ने फटकार दिया तब धुर्व गए जंगल मे और जगत पिता भगवान को प्रप्त कर लिया कहने का अभिप्रया बस यही भगवान के हाथों में अपने जीवन की डोर समर्पित कर दो आप का बेड़ा पार हो जायेगा,, इस बीच कथा के मुख्य यजमान उत्तम कुमार शिवम सिंह अमित सिंह पवन सिंह  मुन्ना सिंह प्रधान भरात सिंह कोटेदार शिवकुमार सिंह पप्पू सिंह पुतान सिंह नागेश्वर मास्टर एवं बहुत से भक्त उपस्थित रहे

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