जेल गये दशरथ की ट्रांसफर अर्जी खारिज, हफ्ते भर से लटकी है रिहाई

जे !  बहस न करने के चलते सेशन कोर्ट ने जमानत खारिज कर भेजा था जेल।सुलतानपुर।(आरएनएस)फौजदारी अपील में बहस न करने के चलते जमानत खारिज होने के बाद जेल गये अभियुक्त की तरफ से जिला जज की अदालत में पड़ी ट्रांसफर अर्जी को बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने नॉटप्रेस कर दिया। बल न दिये जाने के चलते जिला जज तनवीर अहमद ने ट्रांसफर अर्जी खारिज कर दी।
मामला अमेठी थाना क्षेत्र के जंगल रामनगर इलाके से जुड़ा है। जहां के रहने वाले दशरथ पाल को लोअर कोर्ट से मारपीट समेत अन्य आरोपों में दोषी करार दिया गया था। इस फैसले के विरूद्ध दशरथ ने सेशन कोर्ट में अपील की है, जो कि एडीजे तृतीय की अदालत में विचाराधीन है। करीब दो सप्ताह पूर्व अपील में बचाव पक्ष के जरिये बहस न करने के चलते एडीजे तृतीय मनोज कुमार शुक्ल ने अभियुक्त दशरथ की जमानत निरस्त कर उसे जेल भेजने का आदेश दिया। इसी के बाद कोर्ट की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बचाव पक्ष की तरफ से जिला जज की अदालत में अर्जी देकर केस को अन्य अदालत पर ट्रांसफर करने की मांग की गयी थी। ट्रांसफर पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अर्जी को नॉटप्रेस कर दिया। नतीजतन जिला जज ने ट्रांसफर अर्जी खारिज कर दी। मालूम हो कि इस मामले में एडीजे तृतीय की अदालत से जमानत निरस्त होने के बाद दशरथ की तरफ से जिला जज की अदालत में जमानत अर्जी प्रस्तुत की गयी। जिसे जिला जज ने करीब सप्ताह भर पूर्व स्वीकार कर लिया। जिसके क्रम में एडीजे तृतीय की अदालत में दशरथ की तरफ से बेलबांड दाखिल किया गया, लेकिन अभी तक दशरथ की रिहाई नहीं हो सकी है। मिली जानकारी के मुताबिक जिला जज के जरिये पारित किये गये जमानत आदेश पर एडीजे तृतीय मनोज कुमार शुक्ल की अदालत के जरिये सवाल खड़ा किया गया है। जिसके चलते दशरथ की रिहाई सप्ताह भर से अधर में है। इसके पीछे अपर जिला एवं सत्र न्यायालय तृतीय के यहां से जमानत खारिज होने के बाद उसी अदालत में अथवा हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के बजाय जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने एवं उसकी पोषणीयता पर बगैर विचार किये जमानत आदेश पारित कर देने की वजह अधिवक्ताओं के जरिये बताई जा रही है। फिलहाल मामले में आगे क्या होता है यह न्यायालय तय करेगा

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